बुधवार, 14 जुलाई 2010
चिंतन है न कल्पना और चले है ब्लॉगर बनने ......
पिछले दो दिन से अच्छी वर्षा हो रही है ! मौसम काफी खुशनुमा हो गया है ! इस बीच घर में नेट पर बी एस पाबला जी के ब्लॉग दुनिया के मेले की सैर कर रहा हूँ ! पाबला जी की पोस्ट पढ़ पढ़ कर जोश आ रहा है कि हमें भी अब लिखना शुरू कर देना चाहिए !कई बार मित्रो ने भी सलाह दी है कि मुझे फिर से लिखना शुरू कर देना चाहिए,पर एक अनजाना सा डर बना रहता है !लगता है अब पहले जैसी बात नहीं रही है ! न तो पहले जैसा चिंतन है और न कल्पनाओ के वैसे घोड़े ही अब उड़ते है ! हाई स्कूल के बाद कालेज में इंग्लिश मीडियम की पढ़ाई ने न तो हमें अंगरेजी में पारंगत होने दिया और हिन्दी भी हमारी अधकचरी हो कर रह गयी ! घर के रहे न घाट के ! टेक्नीकल इंग्लिश तो वैसे ही भाव विहीन होती ही है ! रात दिन वही पढ़ पढ़ कर हम भी भाव शुन्य हो गए है ! रही सही कसर जीवन में रेत ,गिट्टी पत्थर के बीच (सिविल इंजीनियरिंग) काम करने से पुरी हो गयी है ! पूरी तौर से पथरा गए है हम और अब नेट के सहारे ब्लॉग लिखने की खुशफहमी पाल रहे है ! हे भगवान् अब तू ही कोई रास्ता दिखा !! .....
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1 टिप्पणी:
navagantuk ka swagat hai....
man mey lagan rahe to safalataa milatee hai. bhagvaan bhee rastaa dikhayegaa, usase pahale hamko khud talashana hai. shuruaat achchhi hai. shubhakamanaye.
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