छत्तीसगढ़ राज्य के जांजगीर चाम्पा जिले की एक तहसील है बम्हनीडीह ! इस तहसील में एक छोटा सा गाँव है बिर्रा ! इस ग्राम के एक भोले भाले ग्रामीण ने अपने पारिवारिक मामले का निपटारा करने के लिए जज की टेबल पर सीधे सीधे रिश्वत की राशी रख दी ! जज महोदय हैरान हो गए और पुलिस बुलाकर उस ग्रामीण दुखुराम को रिश्वत देने के आरोप में जेल भिजवा दिया ! जज महोदय को इस कार्यवाही से भले ही संतोष मिला हो ! पर यह घटना हमारी न्याय व्यवस्था में घूंसे भ्रष्टाचार की पोल खोलती है ! आज ग्रामीण जन भी यह समझने लगे है कि बिना पैसा दिए उन्हें न्याय जल्दी नहीं मिल सकेंगा !
अब दुखुराम की परेशानी तो यह है कि उससे काम कराने के जितने पैसे मांगे जा रहे थे, उतने उस गरीब के पास थे नहीं तो देगा कहाँ से ! अमूमन कार्यालयों में यह रिश्वत बड़े साहब के नाम से ही मांगी जाती है ! सो उसने सोचा बड़े साहब तो दयालू होंगे ही और मेरी गरीबी पर तरस खाकर कम पैसे में ही मेरा काम कर देंगे ! सो उस गरीब ने अपनी बुद्धि से जज साहेब को ही सीधे पैसे देने की पेशकश कर दी ! उस बेचारे को क्या मालूम था कि जेल कि हवा खानी पड़ेगी !
बड़े साहेब के नाम से माँगा जाने वाला पैसा किसको कितना मिलता है उसे क्या पता ? मिलता भी है या नहीं ? या कहीं बड़े साहब सीधे नहीं भी लेते हो ? अब बेचारा परेशान है, और जेल से निकलने के लिए किस को पैसा देने पर मुसीबत में नहीं पड़ेगा, यह जानने के लिए मदद की गुहार लगा रहा है ! यदि जज साहेब दुखुराम से प्रेम से उसकी व्यथा सुनते तो शायद उन्हें भी पता चलता कि उनकी नाक के नीचे , उनके नाम पर कैसे कैसे खेल हो रहे है ! दुखुराम तो बेचारा अपनी सीधाई में मारा गया ! आजकल रिश्वत का भी एक विशेषीकृत तरीका ( specifide system ) है ! उचित माध्यम से जाना होंगा ! सीधे गया गए तो दुःख उठाना ही होंगा !
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